હાસ્ય દરબાર

ગુજરાતી બ્લોગ જગતમાં રોજ નવી જોક અને હાસ્યનું હુલ્લડ

आज का सत्य

સાભાર- Mr.Jaffer Kassam

आज का सत्य

🌀नींद आखे बंद करने से नही
Net बंद करने से आती है..!!…
______________

🌀”भूखे को रोटी, और android फ़ोन वाले को
charger देना पुण्य का काम होता है..”
_______________________

🌀शाश्त्रों में लिखना रह गया था…सोचा बता दूँ…!”!
पहले लोग ‘बेटा’ के लिये तरसते थे..
और आजकल डेटा के लिये !
____________________

🌀आज की सबसे बड़ी दुविधा…..
मोबाइल बिगड़ जाये तो बच्चे जिम्मेदार,
और बच्चे बिगड़ जाये तो मोबाइल जिम्मेदार….
__________________

🌀” बदल गया है जमाना पहले माँ का पेर
छू कर निकलते थे,
अब मोबाइल की बेटरी फुल करके निकलते है
😂😝
____________________

🌀कुछ लोग जब रात को अचानक फोन का बैलेंस ख़त्म
होजाता है इतना परेशान हो जाते हैं माने जैसे सुबह तक वो इन्सान
जिंदा ही नहीं रहेगा जिससे बात करनी थी।
__________________

🌀 कुछ लोग जब फ़ोन की बैटरी 1-2% हो तो चार्जर
की तरफ ऐसे भागते है जैसे उससे कह रहे हो
“तुझे कुछ नहीं होगा भाई !
आँखे बंद मत करना मैं हूँ न !
सब ठीक हो जायेगा।
😳😳😳
________________________

🌀कुछ लोग अपने फोन में ऐसे पैटर्न लॉक लगाते हैं
जैस ISI की सारी गुप्त फाइलें उनके फ़ोन में ही पड़ी हो।
😉😜😜😜
____________________

🌀गलती से फ़ोन किसी दुसरे दोस्त के यहाँ छुट
जाए तो ऐसा महसूस होता हैं जैसे अपनी भोली-भाली
गर्लफ्रेंड को शक्ति कपूर के पास छोड़ आये हो।
😃😜😂
______________________

🌀सभी मोबाइल बनाने वाली कंपनीओं वालों से
निवेदन है कि वह मोबाइल फोन बड़ा करवाते जा रहे है तो,
उसमे ऐसी व्यवस्था और करा दें कि पीछे के ढक्कन के
अंदर दो परांठे, आलू की सुखी सब्जी और अचार आ जाये।
😆😆😆😆😆😂😂😜

🌀यह गेम देखिये. आपके दिमाग की बत्ती जला देगा।
इस मैसेज को अपने किसी भी व्हाट्स एप्प ग्रुप में
भेजिए और देखिये लाल रंग वाला दिल कैसे एक स्थान आगे बढ़ जाता है।
: 😜😛😝😱😝😛😋

5 responses to “आज का सत्य

  1. Vimala Gohil August 9, 2016 at 4:35 pm

    હાસ્ય દરબારીઓની જય…

  2. P.K.Davda August 9, 2016 at 8:45 am

    વાહ વાહ ! સત્ય પણ હસતાં હસતાં કહી શકાય છે !

  3. Bhanu Vyas August 9, 2016 at 8:23 am

    Very nice .

    2016-08-08 22:44 GMT-04:00 “હાસ્ય દરબાર” :

    > Vinod R. Patel posted: “સાભાર- Mr.Jaffer Kassam आज का सत्य 🌀नींद आखे बंद
    > करने से नही Net बंद करने से आती है..!!… ______________ 🌀”भूखे को रोटी,
    > और android फ़ोन वाले को charger देना पुण्य का काम होता है..”
    > _______________________ 🌀शाश्त्रों में लिखना रह गया था…सोचा बत”
    >

  4. pragnaju August 9, 2016 at 7:31 am

    जिस तरह निरपेक्ष सत्य नहीं होता, उसी प्रकार निरपेक्ष असंत्य भी नहीं होता। आज का संत्य कल का असत्य है और कल का असत्य आज का सत्य है। इस तरह की सापेक्षता कियावादी सिद्धान्त के सर्वथा अनुकूल ही है । दोनों ही सत्य की मंज़िल तक पहुँचने के मार्ग हैं परंतु दर्शन का विकास मुख्यतया आत्मवाद के रूप में निखरा। इससे मनुष्य को आत्म-साक्षात, कैवल्य व धृति, क्षमा, संतोष, अहिंसा, सत्य आदि मिले। भौतिक सामर्थ्य के आभाव में मनुष्य जी सकता है, वह भी आनंद से, पर अध्यात्मिक व नैतिक सामर्थ्य के बिना भौतिक साधनों के ढेर में ढब मरने के सिवाय मनुष्य के पास कोई चारा नहीं रह जाता।

  5. સુરેશ August 9, 2016 at 6:48 am

    यह गेम देखिये. आपके दिमाग की बत्ती जला देगा।
    https://scratch.mit.edu/projects/74116720/

    ———
    એકે એક જોક મસ્ત અને મોડર્ન છે !

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